गौरी लंकेश के ईसाई होने का क्या है सच?

गौरी लंकेश की हत्या को तीन दिन बीत चुके हैं. अफवाहों का दौर जारी है. कभी कुछ, कभी कुछ. विरोधी और समर्थक. दो खेमे हैं. हर बात का पोस्टमॉर्टम हो रहा है. आरोपों के जवाब में प्रत्यारोप. सवाल के जवाब में सवाल. सोशल मीडिया अखाड़ा बना हुआ है. नई-नई थिअरी उछाली जा रही हैं. हत्या का नक्सल कनेक्शन. कांग्रेस का कथित भ्रष्टाचार. कॉन्सपिरेसी थिअरीज. हिंदू थीं. तो दफनाया क्यों गया? मुसलमान थीं! नहीं, ईसाई थीं. ईसाई पर जोर बढ़ गया है. एक और बात है. कि सच्चा हिंदू मुहूर्त देखकर हत्या करता है. मारने से पहले पंचांग देखता है. तिथि कौन सी है. हत्या के लिए मुनासिब है कि नहीं. ऐसी-ऐसी बकतूत हो रही है कि दिमाग घूम जाएगा. इंसान हैं तो शर्म आएगी. नहीं हैं तो मजा आएगा. झूठ को ही सच मानेंगे.

सोशल मीडिया पर गौरी लंकेश के बारे में कई अफवाहें फैलाई जा रही हैं…

हिंदू थीं, तो दफनाया क्यों गया!

गौरी लंकेश के अंतिम संस्कार से जुड़ी अफवाह. सवाल. हिंदुओं के शव को तो जलाते हैं. उन्हें दफनाया क्यों गया? हम बताते हैं सच. हिंदू धर्म बरगद के पेड़ जैसा है. कई शाखाएं हैं इसकी. विविधताओं से भरी. ऐसी ही एक शाखा है लिंगायत. शैव परंपरा. शिव को पूजने वाले. इसमें शव को दफनाते हैं. लिंगायत समुदाय के अपने कब्रिस्तान होते हैं. गौरी लंकेश भी लिंगायत समाज से थीं.

इस फेसबुक पोस्ट की भाषा देखिए. संस्कृति की विविधता को समझे बिना देशभक्त बनने का दावा करते हैं…

नास्तिक थीं. कर्मकांड नहीं मानती थीं. सो उनको दफनाया गया. बाकी विधियां नहीं की गईं. मंत्रजाप भी नहीं हुआ. कब्र में उनके अखबार की एक प्रति रखी गई. जीवन भर बेबाक लिखती रहीं. सो एक कलम भी रख दी गई.

हम एक देश में रहते हैं. कई लोग देशभक्ति के नाम पर खून-खराबा करते हैं. राष्ट्रवाद की दुहाई देते हैं. पर अपनी परंपराओं को नहीं जानते. संस्कृति से वाकिफ नहीं. लेकिन संस्कृति के नाम पर मरने-मारने को तैयार. दक्षिण भारत के लिए माचिस बराबर समझ नहीं हमारी. दक्षिण ही क्यों. उत्तर-पूर्व के बारे में भी क्या ही पता है! शर्मनाक विरोधाभास है.

पेज का नाम स्वर्णिम हिंद का स्वर्णिम स्वप्न, लेकिन हिंदुस्तान के बारे में पता ही नहीं है

एक और बेवकूफी वाली बात: गौरी लंकेश ईसाई थीं, पूरा नाम था गौरी लंकेश पैट्रिक!

ऊपरवाले ने दिमाग दिया है. खुलकर खर्च करो. बिल नहीं आता. कुछ लोग कंजूसी करते हैं. मूर्खता में नहीं. समझदारी दिखाने में. ऐसे ही लोगों ने पैट्रिक वाला ऐंगल खोजा. गौरी लंकेश अखबार निकालती थीं. गौरी लंकेश पत्रिके. कन्नड़ भाषा में. अंग्रेजी में लिखेंगे Gauri Lankesh Patrike. मूर्खाधिराजों ने कहीं पढ़ा. समझा नाम लिखा है. गौरी लंकेश का पूरा नाम. पत्रिके को पैट्रिक पढ़ लिया.

एक ने बेवकूफी की. दूसरे को बताई. उसका दिमाग भी डब्बा. उसने भी पत्रिके को पैट्रिक समझा. इनको पैट्रिक की स्पेलिंग भी नहीं पता. पैट्रिक को Patrick लिखेंगे. Patrike नहीं. ‘आग की तरह’ फैल गई खबर. वॉट्सऐप की क्लासरूम में. सोशल मीडिया पर. मूर्खों की जमात पूरे आत्मविश्वास से मैदान में उतर आई. अब लगे पड़े हैं. पत्रिके को पैट्रिक साबित करने में.

गौरी लंकेश लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखती थीं, परंपरा के मुताबिक उनके शव को दफनाया गया

 

हिंदू क्या पंचांग देखकर हत्या करने निकलता है?

हत्या का मुहूर्त होता है क्या? हत्यारे तिथि का विचार करते हैं? पंडित से दिन निकलवाते हैं? कि हत्या के लिए शुभ दिन बताइए. ये हम नहीं कह रहे. सोशल मीडिया के कुछ प्राणियों का कुतर्क है. कि हिंदू पितृपक्ष के दिन हत्या नहीं करेगा. अनंत चतुर्दशी के दिन मर्डर नहीं करेगा.

लोग लिख रहे हैं. कि पितृपक्ष की शुरुआत का दिन बड़ा मौका होता है. इस दिन कोई हिंदू किसी को नहीं मारेगा. अपने दुश्मन को तो पक्का नहीं मारेगा. बस ये लॉजिक लगाया. और बचाव में उतर आए. दे दी क्लीन चिट. मर्डर के पीछे शुभ-अशुभ का ऐंगल खोजना? हद ही है ये तो.

ऐसा लिखने वालों से शपथपत्र लेना चाहिए. कि ये इंसान ही हैं. इनके पास भी भेजा है. दिमाग की जगह में भूसा नहीं भरा है. एक सर्वे कर लो. देखो. मूर्खता किस हद तक बढ़ सकती है. अलौकिक है ये बेवकूफी. इतनी मूर्खता कहां से लाद लाते हैं. कि तिथि-मुहूर्त का हवाला देकर ऐसी बकलोल बातें कर जाते हैं. अच्छा हो कि मंगल ग्रह पर बस्तियां बस जाएं. मुमकिन हो तो ऐसे तमाम लोगों को वहीं भेज देंगे. चंदा जमा करके. ये लोग वहां अपने जैसों संग रहेंगे. फिर भी लड़ेंगे. इनको लड़ने की वजहें हर हाल में मिल जाएंगी. जैसे यहां मिल जाती हैं.

गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में एकजुट हुए लोग…

क्या गौरी लंकेश ने इस कार्टून से RSS वर्कर्स की मौत का जश्न मनाया था, देखिए वीडियो:

कितने बीमार हैं ये लोग, जो गौरी लंकेश की लाश पर जश्न मना रहे हैं:

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