लव जिहाद के ‘बगदादी एंगल’ का ऐसे हुआ भंडाफोड़

जिस लव जिहाद को मीडिया अब तक झूठ बताती रही है उसकी सच्चाई सामने आ रही है। पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच नेशनल इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी यानी एआईए को सौंप दी है। केरल के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जिसमें ये अहम आदेश दिया गया है। अदालत ने जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आरवी रवींद्रन को नियुक्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि शादी करके हिंदू लड़की का धर्मांतरण करवाने की इस घटना के पीछे इस्लामी कट्टरपंथियों का संगठित तौर पर हाथ है। इससे पहले 25 मई को केरल हाई कोर्ट ने भी इसे लव जिहाद का मामला मानते हुए शादी को रद्द करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने लव जिहाद को माना

अब तक जब भी लव जिहाद का मुद्दा उठाया जाता रहा है मीडिया उसे हिंदू संगठनों का झूठा प्रचार बताकर खारिज करती रही है। लेकिन अब खुद सुप्रीम कोर्ट ने इसे सच माना है। केरल के इस मामले में पहले एनआईए ने भी कहा था कि लव जिहाद के मामले बढ़ रहे हैं। हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे शादी करने के मामलों में एक पैटर्न देखने को मिल रहा है। 10 जून को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि केरल पुलिस इस केस से जुड़े सारे दस्तावेज एनआईए को सौंप दे, ताकि इस मामले की पूरी तफसील से जांच करवाई जा सके। कोर्ट ने कहा है कि लव जिहाद से जुड़े कई मामले ऐसे हैं जो केरल पुलिस के दायरे के बाहर हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच के लिए जरूरी है कि एनआईए को ये जिम्मेदारी सौंपी जाए।लव जिहाद के लिए ‘संगठित गिरोह’

लड़की के पिता ने केरल हाई कोर्ट में फरियाद लगाई थी कि उनकी बेटी अखिला तमिलनाडु के सलेम में बीएचएमएस की पढ़ाई कर रही थी, उस दौरान वो वहां दो मुस्लिम बहनों के साथ किराए के घर में रहती थी। उन्होंने ही उसको बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन करवाया और फिर दिसंबर 2016 में उसकी शादी एक मुसलमान लड़के शफी जहां से करवा दी। शफी कोल्लम जिले का रहने वाला है और मस्कट में नौकरी करता है। धर्म परिवर्तन के बाद अखिला का नाम हदिया करवा दिया गया। केरल हाई कोर्ट ने शिकायत को सही पाया और शादी को रद्द करके लड़की को पिता के घर जाने का आदेश दिया। लड़की के पिता अशोकन कोट्टायम जिले के रहने वाले हैं।

‘आतंकवादी बनाने की कोशिश हुई’

24 साल की अखिला के पिता अशोकन ने कोर्ट को बताया है कि शादी के बाद शफी ने उनकी बेटी को आतंकवादी संगठन आईएस से जुड़ने के लिए बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने इसके सबूत के तौर पर कुछ तथ्य भी पेश किए। केरल हाईकोर्ट के आदेश पर इस आरोप की जांच पहले से जारी है। अखिला को आतंकवादी बनाने की कोशिश का जो सबसे बड़ा सबूत हाथ लगा वो ये कि शफी ने उसके कुल तीन मुस्लिम नाम रखे थे। इन तीन पहचान के आधार पर सिक्योरिटी एजेंसियों की आंख में धूल झोंककर उसे सीरिया पहुंचाने की तैयारी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों पहलुओं को गंभीर माना है। पीड़ित लड़की के पिता की तरफ से वकील माधवी दीवान ने कहा कि अखिला एक असहाय की तरह है, जो गिरोह के जाल में फंस गई है। उसका ब्रेनवॉश करके इस्लाम अपनाने को मजबूर किया गया।

हजारों हिंदू लड़कियां बनीं शिकार

देश भर में हजारों हिंदू लड़कियों को इस तरह से मुसलमान बनाए जाने के मामले सामने आ चुके हैं। ज्यादातर मामलों में मुसलमान लड़के अपना हिंदू नाम रखकर लड़की को प्रेम-जाल में फंसा लेते हैं और जब लड़की को सच्चाई पता चलती है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ऐसी लड़कियां ज्यादातर बच्चे पैदा करके छोड़ दी जाती हैं। इन लड़कियों को उनका परिवार स्वीकार नहीं करता है, लिहाजा उन्हें मुसलमान बने रहते हुए अपनी मुसलमान नाम वाली औलाद को अकेले पालना पड़ता है। अपुष्ट जानकारी के मुताबिक इस तरह से छोड़ी गईं हिंदू लड़कियों की संख्या लाखों में है। केरल में पिछली कांग्रेसी सरकार के सीएम ओमन चांडी इस मामले में खुलकर बोलते रहे हैं। 2012 में उन्होंने कहा था कि 2006 से राज्य में कम से कम ढाई हजार हिंदू लड़कियों को लव जिहाद के जरिए मुसलमान बनाया जा चुका है। केरल में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें हिंदू लड़कियों को धर्मांतरण के बाद आतंकवाद में झोंक दिया गया। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में लड़कियों की जान तक चली गई।

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