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राजनीति 

एक अकेला सलीम 53 श्रद्धालुओं की जान बचा ले गया, लेकिन पूरी ट्रेन एक जुनैद को ना बचा पाई, अफ़सोस!

अमरनाथ यात्रा पर हुए आतंकी हमले की निंदा दुनियाभर में की जा रही है। पवित्र यात्रा पर कायराना आंतकी हमला देश बर्दाश्त नहीं करेगा ऐसा संदेश दिया जा रहा है। इस आतंकी हमलें में 6 श्रद्धालुओँ की मौत हो गई। 15 लोग घायल बताए गए।

लेकिन इस दर्दनाक मौके पर भी सबका दिल जीतने वाला इस बस का ड्राइवर था। जिसने हिम्मत औऱ दिलेरी से 50 से ज्यादा लोगों की जान बचाई। आतंकियों की गोलियों ने उसे घायल कर दिया लेकिन वह फिर भी वह हिम्मत नहीं हारा।

जब तक उसने श्रद्धालुओं को सुरक्षित जगह पर लाकर छोड़ा वह लगातार गाड़ी चलाता। पूरे हिंदुस्तान ने जिसकी हिम्मत को सलाम किया उसका नाम सलीम शेख था।

सलीम शेख घायल होकर भी गाड़ी को लगातार चलाता। कई किलोमीटर तक गाड़ी को बिना अपनी जान की परवाह किए भगाता रहा।

सबने इसकी दिलेरी को सलाम किया। उसने होश में आकर सबसे पहले 6 जिंदगियां न बचा पाने पर अफसोस जताया। देश से मांफी मांगी।

सोशल मीडिया पर तभी एक बहस छिड़ गई। लोग कहने लगे कि एक सलीम शेख था जिसने 50 से ज्यादा अमरनाथ यात्रियों की जान बचाई दूसरी तरफ पूरी ट्रेन थी जिसने 18 साल के जुनैद को मरने दिया।

दरअसल 24 जून को दिल्ली से पलवल जा रही पैसेंजर ट्रेन में 18 साल के जुनैद की हत्या कर दी गई। हत्यारों ने बीफ का आरोप लगाकर कई किलोमीटर तक चलती ट्रेन में उसे बेरहमी से मारा।

ट्रेन में सवार सैकड़ो यात्री जुनैद की मौत का तमाशा देखते रहे। अब सवाल उठता है क्यों किसी ने रोका नहीं।

क्यों भीड़ इस बेगुनाह को बेरहमी से पीट-पीटकर मार डालने पर उतारू थी ?  क्यों किसी को इस मासूम की दर्द से भरी चीखें सुनाई नहीं दे रही थी ? सलीम शेख और जुनैद की हत्या को इसी कड़ी में जोड़कर लोगों ने देखा।

आपको बता दें कि, जुनैद की हत्या के समय न किसी ने बचाया। न कोई उसकी मौत के जिम्मेदार अपराधियों के खिलाफ गवाही देने करने आया।

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