यूपी में बिजली चोरों के साथ ये करेंगे योगी ..

उत्तर प्रदेश के शहरों और गांवों में 24 घंटे बिजली देने का वादा पूरा करने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने रणनीति तैयार कर ली है। इसके तहत बिजली चोरों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जाएगा। अभी राज्य में खपत और हर रोज होने वाली कटौती के बीच अंतर काफी अधिक है। क्योंकि सप्लाई होने वाली इलेक्ट्रिसिटी का बड़ा हिस्सा चोरों के खाते में चला जाता है। इसी कमी को पूरा करने के लिए पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को लोडशेडिंग के लिए मजबूर होना पड़ता है। उत्तर प्रदेश विद्युत वितरण निगम (UPPCL) ने एक टास्क फोर्स बनाया है जो चोरी को ज़ीरो पर लाने का काम करेगा। इस काम के लिए निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी, क्योंकि बिजली चोरी करवाने में ये लोग सीधे तौर पर शामिल होते हैं। यूपी में अभी पावर का डिस्ट्रिब्यूशन लॉस 33 फीसदी के करीब है।

कैसे रोकी जाएगी बिजली चोरी?

टास्क फोर्स राज्य में पावर सप्लाई करने वाले सभी 14 हजार फीडरों का ऑडिट करेगा। इसके लिए एक बाहरी एजेंसी की सेवाएं ली जा रही हैं। यह एजेंसी रिपोर्ट देगी कि करीब 9000 ग्रामीण और 5000 शहरी फीडरों के जरिए कितनी इलेक्ट्रिसिटी जा रही है और कितनी बिजली वाकई उन घरों तक पहुंच रही है जो बिल चुकाते हैं। इससे पता चल जाएगा कि किस फीडर पर बिजली चोरी हो रही है। इसके लिए सीधे तौर पर वहां के जूनियर इंजीनियर (जेई) को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। आम तौर पर बिजली की ज्यादातर चोरी जूनियर इंजीनियर के स्तर पर ही होती है। क्योंकि इसी स्तर पर कंटिया और मीटर में छेड़छाड़ जैसे जुगाड़ किए जाते हैं। एक वैज्ञानिक तरीका तैयार हो जाएगा जिससे चोरी के लिए अधिकारियों को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराया जा सकेगा। साथ ही जेई को अधिकार दिया जाएगा कि वो छापे मार सके और अवैध कनेक्शनों को काट सके।

कर्मचारियों को ट्रेनिंग जारी

फिलहाल योजना पर अमल के लिए निचले स्तर के कर्मचारियों की ट्रेनिंग का काम जारी है। शुरुआत मध्यांचल विद्युत वितरण निगम से हुई है। कर्मचारियों को बताया जा रहा है कि बिजली चोरी का विकल्प अब खत्म हो चुका है। जो कोई भी चोरी करेगा या करवाएगा वो पकड़ा जाएगा। कर्मचारियों पर ही जिम्मेदारी होगी कि वो कैसे लोगों को उचित लोड का कनेक्शन और मीटर लगवाने के लिए तैयार करें। यूपी पावर कॉरपोरेशन में अभी कुल 1.70 करोड़ कनेक्शन हैं। इनमें से 80 हजार के करीब ऐसे हैं, जिन्होंने मीटर नहीं लगवा रखे हैं। ग्रामीण इलाकों में तो यह अनुपात लगभग ज़ीरो पर है। शहरों में भी बड़ी संख्या में मीटर डिफेक्टिव हैं। इटावा, मैनपुरी और आजमगढ़ जैसे कुछ शहरों में तो बड़ी-बड़ी कोठियों में भी इलेक्ट्रिसिटी मीटर नहीं लगे हैं। अब सरकार इन लोगों को मीटर लगवाने के लिए मजबूर करेगी।

बिजली चोरी पर सरकार का टारगेट

यूपी में अभी बिजली वितरण लॉस 33 फीसदी पर है। सरकार इसे 2018-19 में कम करके 19.36 फीसदी और 2019-20 में 14.86 फीसदी पर लाना चाहती है। जाहिर है ये टारगेट इतना आसान भी नहीं है। लेकिन एनर्जी ऑडिट की मदद से इसे करना संभव माना जा रहा है। फिलहाल अगले कुछ दिनों में यूपी में बिजली चोरों पर बड़े पैमाने पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी है।

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