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राजनीति 

नीतीश का भाजपा से हाथ मिलाना लाखों मुस्लिमों, दलितों और पिछड़ों के साथ धोखा है -राहुल गाँधी

2014 में एक महा गठबंधन की नींव रखी जाती है और नीतीश अपने चिर प्रतिद्वंदी लालू के साथ मिलकर 2015 में विधानसभा चुनाव लड़ते हैं । भाजपा के खिलाफ एकजुट हुई तमाम पार्टियां यह कहकर वोट लेती है कि वह सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ हैं । वो सेक्युलर मूल्यों की रक्षा करने के लिए भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति से लड़ रहे हैं ।

जिनको जो राह चुननी थी उन्होंने चुना। जिन्हें भाजपा के साथ जाना था उन्होंने भाजपा को वोट किया और जिन्हें उसके खिलाफ वोट करना था उन्होंने महागठबंधन को वोट किया । ऐसे में बिहार के लाखों मुसलमानों ने भरोसा करते हुए नीतीश के जदयू को अपना कीमती वोट दिया ,इस बात से अनजान होकर कि उनका दिया हुआ वोट और प्रतिनिधि लेकर वह एक दिन भाजपा में शामिल हो जाएंगे ।

जनता को कुछ और दिखाना और कुछ और बताना लेकिन सत्ता संभालने के लिए उसी पाले में चले जाना जिसके खिलाफ लोगों ने आपको चुना था,ऐसी दगाबाजी के लिए कोई कानूनी प्रावधान है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन नैतिक और सामाजिक स्तर पर यह एक तरह का धोखा है । जिससे नाराज होकर आज करोड़ों मुस्लिमों, दलितों और पिछड़ों का विश्वास न सिर्फ नीतीश से उठ गया बल्कि तमाम ऐसे मौसमी सेक्युलर नेताओं से जो उनके हितों की रक्षा करने की बात करते हैं।

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