गांधी आश्रम की विजिटर बुक में मोदी ने आखिर क्या लिखा? यहां पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय गुजरात दौरे पर गुरुवार को अहमदाबाद पहुंचे. वहां से वह अपनी 100वीं वर्षगांठ मना रहे साबरमती आश्रम पहुंचे. आश्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, महात्मा गांधी के विचारों से आज के समाज को लड़ने की शक्ति मिलती है.

उन्होंने कहा, ‘गांधी जी को समझना है तो गांधी के गुरु श्रीराजचंद्र जी के जीवन के बारे में भी लोगों को जानना चाहिए. गौरक्षा के नाम पर लोगों को मारना ठीक नहीं है. मैं मौजूदा हालात से बहुत पीड़ित हूं.’ इस दौरान प्रधानमंत्री ने वहां विजिटर बुक में संदेश भी लिखा.

प्रधानमंत्री ने विजिटर बुक में यह संदेश लिखा

साबरमती आश्रम की शताब्दी कोई इमारत, संस्था या प्रवृत्ति की मात्र शताब्दी नहीं. यह ऐसी तपोभूमि है जहां सैंकड़ों वर्ष की ग़ुलामी के कारण भारतीय समाज के मूल खंड पर कुठाराघात हुए थे. पूज्य बापू ने यहां ऐसी तपस्या की जहां स्वराज्य के मूल में प्रथम स्व का बोध हो.

स्व की चेतना जागृत हो और सबकुछ स्वभाविक हो, सहज हो और सबको अपना लगे. ऐसा जन-जन का नये सिरे से पोषण हो. मानव से राष्ट्र पालन की रूपरेखा का आश्रम जीवंत साक्षी है. मात्र भारत ही नहीं विश्व की मानवता को उसकी चेतना ने अमरत्त्व का मार्ग आप तपोभूमि में से प्रगट हुआ है.

स्व प्रयास से, स्व अनुभव से इस तपोभूमि को प्रणाम. पूज्य बापू को प्रणाम.

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