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राजनीति 

मोदी को सुलह के संदेश भिजवा रहा है NDTV,जानिये क्यों

एनडीटीवी के मुखिया प्रणय रॉय पिछले दरवाजे से सरकार से सेटिंग करने के चक्कर में हैं। ऐसी खबरें हैं कि वो सरकार और बीजेपी में अपने कुछ करीबी नेताओं के जरिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ये संदेश भिजवा रहे हैं कि वो युद्धविराम या सुलह चाहते हैं। बीजेपी के सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने भी सीबीआई की छापेमारी के दूसरे दिन ऐसे संकेत दिए थे कि एनडीटीवी सरकार से डील करने की फिराक में है। हमें मिली जानकारी के मुताबिक प्रणय रॉय की तरफ से एक फॉर्मूला दिया गया है, जिसके मुताबिक सरकार एनडीटीवी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई रुकवा दे और बदले में चैनल सरकार के खिलाफ अपना दुष्प्रचार बंद कर देगा। हालांकि ऐसे संकेत हैं कि सरकार ऐसे किसी दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं हैं, क्योंकि मामला हवाला और काले धन को सफेद बनाने का है।

दबाव बनाने की राजनीति

बताया जा रहा है कि एनडीटीवी ऊपर से खुद को आक्रामक दिखा रहा है, लेकिन उसका मैनेजमेंट अंदर ही अंदर डरा हुआ है। एक दिन पहले प्रेस क्लब में एनडीटीवी ने अपने समर्थन में एक जलसा कराया था। जिसमें मशहूर वकील फली एस नरीमन, वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर, अरुण शौरी और शेखर गुप्ता जैसे लोगों ने भाषण दिया। ये सभी वो लोग हैं जो अलग-अलग कारणों से नरेंद्र मोदी से नाराज चल रहे हैं। इन सभी ने आर्थिक घपले की जांच में मारे गए एक रुटीन छापे को मीडिया की आजादी पर हमला साबित करने की कोशिश की। प्रणय रॉय ने इस प्रोग्राम में कहा कि “सत्ता के आगे कभी झुकना नहीं है।” लेकिन सच्चाई ये है कि वो पहले से ही झुके हुए हैं। यहां तक कि पिछले दिनों में प्रणय रॉय ने 2-2 बार पीएम मोदी से मुलाकात भी की है।

मोदी से सुलह की कोशिश

एनडीटीवी के कई एडिटोरियल कर्मचारी इस बात की पुष्टि करते हैं कि प्रणय रॉय पिछले तीन साल में कम से कम दो बार पीएम मोदी से मिल चुके हैं। 2014 के आखिर में न्यूजरूम में आकर खुद ही कहा था कि स्वच्छता अभियान को लेकर उनकी पीएम से मुलाकात होने वाली है। इस मुलाकात में एक बार भी गुजरात दंगों या आर्थिक घपलों का जिक्र नहीं हुआ। इसके बाद प्रणय रॉय ने न्यूज़रूम में आकर बोला था कि “मोदी के मन में गुजरात दंगों को लेकर कोई खटास नहीं है और वो चाहते हैं कि मैं और राधिका कच्छ की रन में छुट्टी मनाने जाऊं।” कच्छ से छुट्टी मनाकर लौटने के बाद प्रणय रॉय ने एक बार फिर मोदी से मिलने का जुगाड़ कर लिया। इस बार भी एक सीनियर मंत्री ने मुलाकात में मदद की थी। ये मुलाकात 2015 के शुरुआती दिनों में हुई थी। इसमें रॉय ने पीएम मोदी को बताया कि कच्छ बहुत खूबसूरत जगह लगी और वहां जाने की सलाह देने के लिए शुक्रिया।

लगा था कि मोदी बदल गए

मोदी से अपनी मुलाकातों के बाद डॉक्टर रॉय ने अपने सहयोगियों से यहां तक कहा कि मोदी अब बदल चुके हैं और फलां कैबिनेट मंत्री के कहने के मुताबिक ही चलते हैं। प्रधानमंत्री बनने के बाद उनमें गुजरात दंगों को लेकर कोई खटास भी नहीं है। हालांकि वो सिर्फ जनता को दिखाने (public posturing) के लिए मीडिया से थोड़ी दूरी बरत रहे हैं। लेकिन ये खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी। मोदी ने रेवेन्यू सेक्रेटरी शक्तिकांत दास को पद से हटा दिया, जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2030 करोड़ रुपये के हवाला के मामले में एनडीटीवी को फेमा कानून के तहत नोटिस भेज दिया। इसके बाद 525 करोड़ रुपये टैक्स चोरी का मामला भी खुल गया। अब प्रणय रॉय कह रहे हैं कि वो झुकेंगे नहीं, लेकिन पहले वो मोदी के आगे झुक ही नहीं, बल्कि रेंग भी चुके थे।

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