सेकुलरवादी मीडिया के दोगलेपन पर पत्रकार मिन्हाज मर्चेंट का तीखा प्रहार

आज के दौर में देश का सेकुलर मीडिया अपने हितों को साधने की खातिर पत्रकारिता के सिद्धांतों को ताक पर धर सच को दबाता रहा है। यही कारण है कि न तो गोधरा में जिंदा जला दिए गए लोगों की खबर दिखाई जाती है और न ही कश्मीर की आजादी के नारे लगाने वालों की खबर ली जाती है। मीडिया हिंदुओं को हत्यारा कहते नहीं हिचकिचाता है लेकिन जब कोई मुस्लिम हत्यारा निकलेगा तो उसपर पर्दा डालने की भी भरपूर कोशिश करता है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के दौर का मीडिया हिन्दू विरोधी हो चुका है। इसी को लेकर पत्रकार मिन्हाज मर्जेन्ट ने ट्वीट कर पत्रकारिता पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा है कि, पत्रकारिता का पहला नियम: जब एक मुसलमान को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जाए तो उसके नाम का खुलासा करके सांप्रदायिकता न फैलाएं। यही नियम तब भी लागू होना चाहिए जब एक मुस्लिम

यहाँ आपको बता दूं कि हाल ही में घटी दो अलग-अलग घटनाओं के प्रति मिडिया के रवैये से कई सवाल पैदा होते है। पहली घटना कश्मीर की है, जहां मस्जिद के बाहर मुस्लिम भीड़ ने डीएसपी मोहम्मद अयूब पंडित की पीट-पीट कर हत्या कर दी। दूसरी घटनाहरियाणा के पलवल की हैं, जहां ट्रेन में जुनैद की पीट-पीटकर हत्या की गई।

दोनों घटनाओं को लेकर मीडिया का रवैया अलग-अलग है। डीएसपी की हत्या के मामले को इतनी मुख्यता नहीं दी जा रही जितनी जुनैद की हत्या को लेकर दी जा रही है। सेकुलरवादी मीडिया द्वारा हिंदुओं को दोषी ठहराने की भरसक कोशिश जारी है। सेकुलरवाद के नाम पर मीडिया का पतन होता जा रहा है।

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