शर्मनाक: स्वतंत्रता दिवस पर इस मुस्लिम नेता का इस्लाम-प्रेम देखकर आप..

11 अगस्त को उत्तर प्रदेश के मदरसों में 15 अगस्त को सभी मदरसों में राष्ट्रगान गाना अनिवार्य किया गया थाl उत्तर प्रदेश मदरसा परिषद की ओर आदेश जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि राज्य के सभी मदरसों में 15 अगस्त को ध्वरारोहण किया जाएl आर्डर में कहा गया है कि इस दौरान सभी मदरसों में स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में बताया जाए, शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाए. खेलकूद का आयोजन किया जाएl

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लेकिन सपा के नेता मालविया अली ने इस पर कुछ ऐसा कहा है कि आपका भी दिल आग पकड़ लेगाl समाजवादी पार्टी के नेता मालविया अली का कहना है कि हम पहले मुसलमान है और बाद में भारतीय। इस प्रकार का बयान देने के बाद माविया ने आग में घी डालने का काम किया है।

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यह बयान सपा नेता ने ऐसे समय पर दिया है जब उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता दिवस सभी मदरसों में मनाये जाने और साथ ही इसकी एक वीडियो भी बनाई जाने का सर्क्यूलर पास किया।

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देवबंद विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधियक ब्रिजेश सिंह से हारने वाले माविया अली ने तो इसे एंटी-इस्लामिक ही बता डालाl उन्होंने कहा कि सूबे की सरकार का स्वतंत्रता दिवस मदरसों में मनाने की बात से साफ झलकता है कि यह कदम एंटी-इस्लामिक है।

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माविया ने कहा- “हम सरकार के इस फैसले को मानने के लिए कतई भी तैयार नहीं है। मैं एक बार फिर से यह बात कहना चाहूंगा कि हम पहले मुसलमान हैं और बाद में भारतीय। अगर कोई भी स्थिती इस्लाम के साथ हमारे बीच दरार पैदा करती है तो हम संविधान के द्वारा उसके साथ नहीं खड़े होंगे। हम केवल…

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हम केवल इस्लाम के लिए खड़े रहेंगे। आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है जब सपा नेता अपने किसी बयान को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले साल 2015 में माविया ने कहा था कि अगर विश्व हिंदू परिषद की नेता साध्वी प्राची की हत्या कर दी जाती है तो इसमें कोई नुकसान नहीं है।”

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गौरतलब है कि कुछ दिन पहले अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा था कि सभी मदरसों को निर्देश दिये गये हैं कि वे स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनायें और इस कार्यक्रम की वीडियोग्राफी भी करवायें।

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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने पीटीआई से कहा, ”उत्तर प्रदेश सरकार ने यदि यह आदेश और दिशानिर्देश सभी स्कूल, कालेज और शैक्षणिक संस्थानो के बारे में जारी किये होते तो हमें कोई विरोध नहीं था, लेकिन अगर यह आदेश सिर्फ मदरसों के लिये है तो इसका मतलब यह है कि हमारी राष्ट्रभक्ति को संदेह की नजरों से देखा जा रहा है।”

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