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धर्म परिवर्तन कर तीन माह में चोर से आतंकी बना संदीप

मुजफ्फरनगर के संदीप शर्मा ने इस्लाम धर्म अपना कर अपना नाम आदिल रखा और दिनचर्या धर्म के अनुरूप कर ली। वह तीन माह में चोर से आतंकी बन गया।

लखनऊ (जेएनएन)। लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने से पहले मुजफ्फरनगर के संदीप शर्मा ने इस्लाम धर्म अपना लिया था। आदिल नाम रखने के बाद उसने अपनी दिनचर्या नए धर्म के अनुरूप कर ली थी। हालांकि तीन माह पहले तक उसका कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था। उसके धर्मांतरण के पीछे कश्मीर की मुस्लिम युवती से प्रेम विवाह और जल्द अमीर बनने की लालसा थी। कश्मीर पहुंची यूपी एटीएस की तफ्तीश में यह राजफाश हुआ है। यह भी पता चला कि सेना के गश्ती दल, पुलिस पर हमले के समय संदीप उर्फ आदिल आतंकियों के ड्राइवर की भूमिका निभाता था। चेकपोस्टों पर वह हिंदू नाम से बने पहचान पत्र के जरिये खुद और आतंकियों को सुरक्षा कर्मियों की गिरफ्त से बचाता था।

पावर ग्रिड निर्माण वाली कंपनी

संदीप शर्मा उर्फ आदिल के पकड़े जाने के बाद सक्रिय हुई सुरक्षा एजेंसियों ने छानबीन शुरू की, जिसमें पता चला कि वर्ष 2012 में मुजफ्फरनगर के खजूरी क्षेत्र के निवासी व ठेकेदार वकील ने उसे पावर ग्रिड का ठेका लेने वाली कंपनी में बतौर वेल्डर रखवाया था। कंपनी के पास मुंबई व अनंतनाग क्षेत्र में पावर ग्रिड निर्माण का ठेका है। इसी कंपनी ने मुजफ्फरनगर के तीन और लड़कों के साथ संदीप शर्मा को कश्मीर भेजा था। कुछ अरसा बाद तीनों लड़के घर लौट आये मगर संदीप शर्मा कुलगाम में एक किराये के मकान में रहने लगा। कुछ अरसे में वह मकान मालिक की लड़की के संपर्क में आ गया। लड़की के दो भाइयों से भी उसकी गहरी दोस्ती हो गयी। एटीएस के सूत्रों का कहना है कि ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की लालसा में संदीप ने पहले क्षेत्रीय निवासी शाहिद अहमद, मुनीब शाह, मुजफ्फर अहमद के साथ अपराध की दुनिया में दाखिल हुआ। एटीएम उखाडऩे जैसा दुस्साहसी अपराध करने लगा।

लश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में  इस्लाम कुबूला

सूत्रों का का कहना है कि अपराध की दुनिया में कूदने के बाद वह पाकिस्तान पोषित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में आया और फिर उनसे प्रभावित होकर इस्लाम धर्म कुबूल लिया। मकान मालिक व उसके परिवार के सदस्य पहले ही इस बात का दबाव बना रहे थे कि मुसलमान बनने पर ही वह अपनी लड़की का उसके साथ विवाह करेंगे। ऐसे में उसने कश्मीर की एक मस्जिद में हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपना लिया। मकान मालिक की बेटी से विवाह भी कर लिया और फिर लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेनिंग सेन्टर से असलहे चलाने का प्रशिक्षण लेकर उनका का गुर्गा बन गया।  एटीएस के आइजी असीम अरुण ने स्वीकार किया है कि उनकी तफ्तीश में यह बात सामने आयी है कि संदीप लश्कर का आतंकियों की गाड़ी चलाने का कार्य करता था। वह तीन जून, 2017 को काजीगुंड में सेना के गश्ती दल पर हमले में शामिल था। 13 जून को कश्मीर के न्यायमूर्ति के सुरक्षा पोस्ट पर हमला कर लूटपाट की थी। 16 जून को अच्छाबल में हुए हमले वाहन चलाने का जुर्म उसने स्वीकार किया है। जांच एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि तफ्तीश का विषय यह है कि जिस मुस्लिम लड़की से संदीप ने शादी की है, उसके परिवार का कोई आतंकी कनेक्शन है या नहीं है। अगर कोई कनेक्शन मिलता है तब उसके हनी ट्रैप के शिकार होने की दिशा में पड़ताल की जाएगी।

तीन माह में चोर से आतंकी

तीन माह पहले तक संदीप शर्मा का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था, लेकिन छोटी सी अवधि में उसने चोर से आतंकी बनने तक का सफर तय कर लिया। तीन महीने पहले उसी जनपद की पुलिस ने उसे कंबल और मोबाइल चोरी के आरोप में पकड़ा था। उसे जमानत पर छोड़ा गया। तीन माह बाद उसके आतंकी बनने का भी पर्दाफाश हो गया।  संदीप शर्मा के बड़े भाई प्रवीण कुमार ने बताया कि तीन महीने पहले उसके पास एक फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को अनंतनाग थाने का एसएचओ बताया था। उसी ने बताया कि संदीप कम्बल और मोबाइल चोरी के आरोप में दो साथियों के साथ पकड़ा गया है। थोड़ी देर बाद फिर एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को थाने का मुंशी बताया था। उसे कश्मीर बुलाया गया, लेकिन वह नहीं गया। दो घंटे बाद फिर एक व्यक्ति का फोन आया था, उसने खुद को संदीप के पकड़े गए साथियों का परिजन बताया था।

अचानक आतंकी होने का पता चला

बकौल प्रवीण कुमार, पकड़े गए संदीप के साथी के परिजनों का कहना था कि पुलिस इन्हें छोडऩे के लिए एक लाख रुपये मांग रही है। संदीप ने पैसे देने से मना कर दिया। इसके बाद भी उन्होंने कई बार फोन किया था और पैसे मांगे थे। प्रवीण के गाड़ी मालिकों ने एसएसपी अनंतनाग से फोन पर बात करके पैसे मांगे जाने की जानकारी दी थी। पांच दिन बाद परिजनों का फिर फोन आया था। उन्होंने संदीप को छोडऩे की बात कही थी। चार-पांच दिन बाद संदीप का फोन आया। उसने केवल हाल चाल पूछा और फोन रख दिया। इसके बाद कोई बात नहीं हुई। बकौल प्रवीण, इसके बाद अचानक उसके आतंकी होने का पता चला। प्रवीण ने कहा कि संदीप की शादी या किसी लड़की से प्रेम प्रसंग की जानकारी उसे नहीं है। धर्मपरिवर्तन की बात भी पुलिस से पता चली है। प्रवीण ने बताया कि पांच साल पहले संदीप मुंबई गया था। उसके दो साल बाद कश्मीर गया। वह आठ-दस हजार रुपये प्रति माह पर वेल्ंिडग का काम करता था। बकौल प्रवीण, संदीप ने घर पर कभी पैसा नहीं दिया। अकेला खर्च करता था। फिर भी आर्थिक तंगी इस कदर थी कि संदीप के पास अपना मोबाइल भी नहीं था। वह हमेशा दूसरों के मोबाइल से बात करता था। प्रवीण ने बताया कि दिल्ली के खजूरी इलाके में रहने वाला ठेकेदार वकील जम्मू-कश्मीर स्थित पावर ग्रिड में ठेकेदारी करता है। उसके यहां काम करने संदीप अपने फुफेरे भाई सोनू शर्मा के साथ यहां से गया था। जांच एजेंसियां ठेकेदार से पूछताछ कर रही हैं।

आतंकी संदीप के परिजनों को क्लीनचिट

मुजफ्फरनगर पुलिस से लेकर आइबी तक सभी जांच एजेंसियों ने पूछताछ के बाद संदीप के परिजनों को छोड़ दिया। उसकी मां और भाभी को तो पहले ही छोड़ दिया गया था। बुधवार को उसके सगे भाई प्रवीण और रिश्तेदार सोनू शर्मा को भी घर भेज दिया गया। मोरना निवासी एक अन्य युवक आसिफ उर्फ कल्लू तथा दिल्ली के ठेकेदार वकील से अभी पूछताछ जारी है। बुधवार दोपहर बाद संदीप के परिजनों ने कहा कि कई सालों से उनका संदीप से कोई संपर्क नहीं था। जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा आतंकी संदीप शर्मा उर्फ आदिल की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय पुलिस, एलआइयू, एसटीएफ, एटीएस और आइबी ने संदीप की मां प्रेमवती, भाभी रेखा, भाई प्रवीण, रिश्तेदार सोनू शर्मा को हिरासत में लिया था। उनसे चौबीस घंटे तक पूछताछ भी हुई थी। इस दौरान परिजनों की कॉल डिटेल के साथ बैंक के खाते भी खंगाले गए। सभी जांच एजेंसियों ने उसकी मां प्रेमवती और भाभी रेखा को तो सोमवार की रात ही छोड़ दिया गया था, जबकि उसके भाई प्रवीण को भी बुधवार को छोड़ दिया गया। उधर, पुलिस ने दिल्ली के ठेकेदार वकील तथा मोरना निवासी आसिफ को भी अभी हिरासत में ले रखा है। इनसे अभी पूछताछ की जा रही है। इस संबंध में जनपद का कोई भी पुलिस का अधिकारी बात करने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि मामले की जांच दूसरी एजेंसियां कर रही हैं।

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