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खेल 

क्या केरल हाईकोर्ट का ये ऑर्डर श्रीसंत की नैय्या पार लगा देगा?

श्रीसंत. भारतीय क्रिकेट का बिगडैल लड़का. तेज़ गेंदबाज़ी की दुनिया में एक वक़्त खूब चमका हुआ सितारा. लेकिन उद्दंड, अभिमानी, दंभी भी. एक दिन स्पॉट फिक्सिंग में फंस कर खुद का ही करियर खा गया. आज भी श्रीसंत से जुड़ी कितनी ही तस्वीरें हम सबके ज़हन में ताज़ा है. सबसे शानदार वो है, जिसमें श्रीसंत मिस्बाह उल हक़ का कैच पकड़ते हैं और पहला 20-20 वर्ल्ड कप भारत आता है. लेकिन फिर आईपीएल में तौलिया कांड भी याद आता है और तमाम सुनहरी यादों पर सियाही फिर जाती है.

बहरहाल, 2013 में हुए उस कांड के बाद बीसीसीआई ने श्रीसंत पर आजीवन बैन लगा दिया था. श्रीसंत इस बैन के खिलाफ़ कोर्ट गए थे. ये केस श्रीसंत जीत गए हैं. केरल कोर्ट ने बीसीसीआई से कहा है कि वो श्रीसंत पर लगा हुआ बैन हटा ले.

उल्टा चोर कोतवाल वाला मामला क्यों नहीं है ये?

आपको हैरानी हो रही होगी कि इतने बड़े स्कैंडल में नाम आने के बावजूद श्रीसंत हिम्मत कैसे कर पाए, बोर्ड के खिलाफ़ कोर्ट जाने की? तो जनाब तमाम माजरा ये है.

2013 में जब स्पॉट फिक्सिंग कांड सामने आया था, तब बीसीसीआई से तत्काल श्रीसंत पर बैन लगा दिया था. पुलिस की जांच चलती रही. 2015 में दिल्ली कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया. तभी से श्रीसंत बोर्ड से कह रहे हैं कि वो उन पर से बैन हटा ले. लेकिन बीसीसीआई नहीं माना. बैन कायम रखा.

हाईकोर्ट में क्या तर्क दिए श्रीसंत ने?

दिल्ली कोर्ट से दोषमुक्त होने के बावजूद बैन न हटने के बाद श्रीसंत हाईकोर्ट की शरण में गए. उनका कहना था कि उन पर बैन लगाए रखना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है. बीसीसीआई ने उस जानकारी के आधार पर बैन लगाया था जो दिल्ली पुलिस ने उसे सौंपी थी. उसी जानकारी के आधार पर दिल्ली कोर्ट में केस चला, जिसमें उन्हें रिहा कर दिया गया. ऐसे में पाबंदी लगाए रखना ज़ुल्म है.

श्रीसंत ने हाईकोर्ट में ये याचिका इसी साल मार्च में डाली थी. जिसके जवाब में अप्रैल में बीसीसीआई ने कोर्ट से कहा था कि एक क्रिमिनल कोर्ट से दोषमुक्त हो जाना काफी नहीं है बैन हटाने के लिए.

कोर्ट में पेश किए अपने हलफनामे में बोर्ड का कहना था कि क्रिमिनल केस को जीतने के लिए ज़्यादा सबूतों की ज़रूरत होती है. हो सकता है जो सबूत उपलब्ध हैं उनके आधार पर कोर्ट कोई सज़ा देने में खुद को अक्षम पाता हो. लेकिन वो सबूत किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए काफी हैं. बीसीसीआई ने ये भी कहा कि दिल्ली कोर्ट के फैसले की उसे ख़बर थी. उसके बाद बोर्ड मेम्बर्स की एक मीटिंग हुई जिसमें बैन जारी रखने का फैसला किया गया.

आगे क्या होगा अब, क्या फिर खेलेंगे श्रीसंत?

भले ही श्रीसंत पर से बैन हट गया हो, लेकिन उनका फिर से टीम के लिए खेल पाना संदिग्ध ही है. एक तो मुख्यधारा के क्रिकेट में उन्हें बीसीसीआई ही नहीं कंसीडर करेगी, जिससे वो मुकदमेबाज़ी कर रहे हैं. ऊपर से पब्लिक सेंटिमेंट भी उनके खिलाफ़ है. आख़िर कौन भूल सकता है उनकी वो तमाम उद्दंडता, उनका घमंड और उनका वो धोख़ा.

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