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गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में 30 बच्चों की मौत के मामले में गहरी साजिश के सुराग मिल रहे हैं। शुरुआती छानबीन में जो बातें सामने आ रही हैं वो चौंकाने वाली हैं। इनके मुताबिक बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की भूमिका संदिग्ध है। डॉक्टर राजीव मिश्रा पिछली अखिलेश सरकार के बेहद खास माने जाते रहे हैं। यह भी पता चला है कि उन्हें ऑक्सीजन खत्म होने और उसके बाद की स्थिति का अच्छी तरह से पता था, इसलिए वो पहले ही भाग निकले। ऑक्सीजन कंपनी के बकाये के भुगतान की रकम 7 अगस्त को ही राज्य सरकार की तरफ से रिलीज कर दी गई थी, लेकिन प्रिंसिपल ने ये रकम बच्चों की मौत के बाद 11 अगस्त को जारी की। मेडिकल कॉलेज के कई कर्मचारी दबी जुबान में इशारा कर रहे हैं कि इस घटना के पीछे सोची-समझी साजिश थी। जिस तरह से मीडिया ने इस मामले में शुरू में गलतफहमी फैलाने की कोशिश की वो भी इसी साजिश का भाग है।

प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की साजिश!

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों की चिट्ठी वगैरह से यह साफ हो चुका है कि उन्हें कई दिनों से ऑक्सीजन की दिक्कत का पता था। डॉक्टर भी उनको स्थिति के बारे में मौखिक तौर पर बता चुके थे। लेकिन राजीव मिश्रा ने कोई कार्रवाई नहीं की। यहां तक कि पिछले दिनों सीएम योगी आदित्यनाथ जब अस्पताल में आए तो उन्हें भी इस बारे में कुछ नहीं बताया। दो दिन पहले जब मीडिया ने पूछा तो डॉ. मिश्रा ने कहा था कि ऑक्सीजन का बजट आ गया है और जल्दी ही भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद वो मीडिया को मैनेज करने में लगे रहे, लेकिन पेमेंट को रोके रखा। जिस दिन हालात बिगड़ने की आशंका थी वो गोरखपुर से दिल्ली चले गए और अपना मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर लिया। 11 अगस्त को घटना के दिन देर रात तक उनका फोन स्विच्ड ऑफ रहा।

‘कमीशन के चक्कर में थे प्रिंसिपल’

डॉ. राजीव मिश्रा के बारे में यह आम जानकारी है कि वो बिना अपना कमीशन लिए कुछ नहीं करते थे। कॉलेज में सफाईकर्मी से लेकर लेक्चरर तक की नियुक्ति में उनका हिस्सा पहले से तय होता है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने दावा किया है कि कैंपस के अंदर रेहड़ी लगाने वालों तक से ये लोग वसूली करते हैं। उनकी पत्नी पूर्णिमा शुक्ला भी डॉक्टर हैं और आरोप है कि कमीशनखोरी के इस रैकेट की वो अहम कड़ी हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज के स्टाफ ने खुलकर आरोप लगाया है कि पूर्णिमा शुक्ला फाइलों पर दस्तखत तक करवाने के लिए उन्हें कई-कई घंटे इंतजार कराती थी। जबकि पैसा खिलाने वालों के काम आराम से हो जाया करते थे। इन दोनों पति-पत्नी के खिलाफ ढेरों शिकायतें थीं, लेकिन हैरानी इस बात की है कि उनके खिलाफ कभी कोई सुनवाई नहीं हुई।

गैस सप्लायर का अखिलेश कनेक्शन

शुरुआती पड़ताल में यह दावा किया जा रहा है कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स का मालिक मनीष भंडारी उत्तराखंड का रहने वाला है और उसके डिंपल यादव के परिवार से करीबी रिश्ते हैं। अखिलेश सरकार के दौरान ही उसे यूपी के कई अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई करने का ठेका दिया गया था। कहते हैं कि वो ऑक्सीजन की ओवरबिलिंग किया करता था। बीजेपी की सरकार बनने के बाद उसके कारोबार में दिक्कत शुरू हो गई। साथ ही प्रिंसिपल राजीव मिश्रा ने ज्यादा कमीशन की मांग शुरू कर दी और उसके सारे बिल लटका दिए। अस्पताल से जुड़े कई लोगों का कहना है कि मनीष भंडारी बड़ा कारोबारी है वो सिर्फ 69 लाख के लिए इतने बच्चों की मौत का नहीं कर सकता। हो सकता है कि इससे भी ज्यादा फायदे के लिए कोई सियासी साजिश रची गई हो। फिलहाल हर कोई मान रहा है कि मनीष भंडारी के सियासी कनेक्शनों की ढंग से जांच हो तो असली कहानी सामने आ जाएगी।

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