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अजब गजब 

#फतवा : एक पिता की बेटी के प्रति वासना पाप नहीं

मुस्लिम राष्ट्र तुर्की में धार्मिक मामलों की देखरेख करने वाली संस्था को धार्मिक मामलों का निदेशालय या दियानेत कहा जाता है जो कि 85,000 मस्जिदों को नियंत्रित करता है. यही दियानेत तुर्की के मुसलमानों के लिए फतवे जारी करता है. बता दें कि दियानेत को मिलने वाला सलाना बजट यहां के 10 मंत्रालयों को मिलने वाले बजट के बराबर होता है और इसके अध्यक्ष, जोकि सरकार द्वारा नियुक्त मौलवी होते हैं, 4 लाख डॉलर की कार से चलते हैं.
मगर दियानेत हाल ही में जारी किए गए अपने दो और फतवों की वजह से सुर्खियों में है. इन दो फतवों ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी और दियानेत को तीखी आलोचना झेलनी पड़ी. मगर विवाद बढ़ता देख दियानेत ने खासकर इस्लाम में पिता-पुत्री के रिश्ते को लेकर जारी किए गए फतवे से किनारा कर लिया . दियानेत के पहले फतवे अनुसार सगाई करने वाली जोड़ियों को इस अवधि में जोड़ियों द्वारा एक दूसरे को जानने के लिए मिलना और बात करना ठीक नहीं है. इस दौरान उनके परिवार की जानकारी या अनजाने में अवांछित घटनाएं हो सकती हैं. जैसे कि फ्लर्ट करना, साथ रहना या अकेले रहना.

इससे गपशप और हाथ पकड़ने जैसी बातों को बढ़ावा मिलता है, जिसकी इस्लाम में इजाजत नहीं है. इस फतवे की लोगों ने आलोचना की और इस बात पर हैरानी जताई की सगाई करने वाले जोड़ों द्वारा एकदूसरे का हाथ पकड़ना इस्लाम में गलत कैसे हो सकता है. वहीं दूसरे फतवे में पिता द्वारा अपनी बेटी के प्रति वासना की इच्छा रखने पर उसकी शादी पर इसका कोई प्रभाव न पड़ने की बात कही गई थी. इसे दियानेत की वेबसाइट के फतवा सेक्शन में कुछ देर के लिए पब्लिश किया गया था (जोकि बाद में डिलीट कर दिया गया.) इसे एक पूछे गए सवाल के जवाब के रूप में पब्लिश किया गया था. किसी का सवाल था – क्या धार्मिक नजरिए से एक पिता द्वारा अपनी बेटी के प्रति सेक्शुअल इच्छाएं रखने का परिणाम उसकी शादी के अमान्य होने के तौर पर सामने आ सकता है? तब इसके जवाब में दियानेत उलेमा ने कहा – “ इस मामले में इस्लाम के विभिन्न विचारधाराओं में अलग-अलग मत हैं. कुछ के मुताबिक, एक पिता द्वारा अपनी पुत्री को वासना के कारण चूमने या सहलाने का उस व्यक्ति की शादी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है.

इस्लाम के एक मत, हनाफी, के मुताबिक मां ऐसे पुरुष के लिए निषिद्ध होगी. ‘अगर लड़की की उम्र नौ वर्ष से ज्यादा हो. “ बाद में इस फतवे से हुई आलोचना के बाद दियानेत ने पहले तो इस जवाब को वेबसाइट से डिलीट किया और फिर कहा कि संस्थान की छवि खराब करने के उद्देश्य से उलेमा के जवाब के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है. उसके बाद तो दियानेत ने सवाल-जवाब के सेक्शन को ही बंद कर दिया. तब दियानेत के इस फतवे की दुनिया भर में तीखी आलोचना की गई. खुद हजारों तुर्की नागरिकों ने इस फतवे का विरोध करते हुए इसे उलेमा द्वारा बच्चों के यौन शोषण को प्रोत्साहन देने का आरोप लगाया. दियानेत के बचाव में खुद तुर्की सरकार के न्याय मंत्री बेकिर बोजडाग यह कहते हुए सामने आए कि यह इस धार्मिक संस्था के ‘चरित्र हनन’ की कोशिश है. मंत्री ने कहा कि यह कोशिश उन लोगों ने की है जो धर्म और उलेमा से नाराज हैं.

 

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