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राजनीति 

कांग्रेस को लगा बिहार में झटका ..फिर से

देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी लगातार बज रही है। गुजरात के बाद अब बिहार से भी कांग्रेसी खेमे के लिए निराशा की खबर आ रही है। गुजरात में जहां अपने विधायकों को एकजुट करने के लिए कांग्रेस आलाकमान खासी मशक्कत कर रहा है, वहीं बिहार में भी पार्टी के कुछ विधायकों के टूटने की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

बिहार में इस वक्त कांग्रेस के 27 एमएलए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस वक्त 9 विधायक जेडीयू-बीजेपी गठबंधन के संपर्क में हैं। एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया, ‘कुछ नेता बिहार में बीजेपी के बड़े नेताओं से संपर्क में हैं। कुछ ऐसे भी विधायक हैं जो नई सरकार के गठन के बाद से ही नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के संपर्क में हैं।’

बता दें कि गुजरात में भी राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को करारा झटका लग चुका है। पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं में से एक शंकर सिंह वाघेला ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। इसके अलावा, कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया है। राज्यसभा चुनाव तक विधायकों को एकजुट रखने के उद्देश्य से कांग्रेस ने सभी विधायकों को बेंगलुरु के एक रिजॉर्ट में भेज दिया था। हालांकि, विधायकों के मेजबान डी शिवकुमार पर इनकम टैक्स विभाग के छापे के बाद पार्टी के लिए असहज स्थिति है।

2015 के विधानसभा चुनावों में जेडीयू-आरजेडी और कांग्रेस ने महागठबंधन बनाकर एक साथ चुनाव लड़ा था। राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस को जमीनी आधार मजबूत होने के कारण नहीं बल्कि महागठबंधन के कारण इतनी सीटें मिलीं। जेडीयू और आरजेडी के साथ गठबंधन का कांग्रेस को सीटों के लिहाज से बड़ा फायदा हुआ था। बता दें कि 2010 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सिर्फ 4 विधायक ही विधानसभा पहुंच पाए थे।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने बताया, ‘कांग्रेस के विधायक इस वक्त बहुत दयनीय स्थिति में हैं। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का कद लगातार घट ही रहा है। इस वजह से बिहार के कांग्रेसी विधायक काफी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने कांग्रेस के विधायकों के साथ अच्छे संबंध बनाए हैं। बिहार में कांग्रेस के अध्यक्ष और पिछली सरकार में मंत्री रहे अशोक चौधरी के भी उनके साथ दोस्ताना संबंध हैं। इस वजह से कुछ विधायक जेडीयू के संपर्क में हैं और कुछ ने हमसे संपर्क किया है।’

इस बारे में अधिक जानकारी के लिए अशोक चौधरी से संपर्क नहीं हो सका। इस बीच, ऐसी अटकलें लग रही हैं कि जेडीयू में शरद यादव के करीबी विधायकों में से कुछ पार्टी छोड़कर आरजेडी में जा सकते हैं। हालांकि, जेडीयू ने इस तरह की आशंका को खारिज किया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘कुछ विधायक शरद जी के करीबी हैं। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वे नीतीश जी और पार्टी को छोड़ देंगे। इनमें से अधिकतर नए मंत्रिमंडल में मंत्री बने हैं। इस वजह से उनके जेडीयू से टूटने का कोई प्रश्न नहीं है।’

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