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वाह केजरीवाल जी क्या बात !सरकारी स्कूलों के रिजल्ट बना दिए पब्लिक स्कूलों से बेहतर

नई दिल्ली:  दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने अपनी दो प्राथमिकताओं को सबसे ऊपर रखा था. एक था स्वास्थ्य दूसरी शिक्षा. स्वास्थ्य में घर के पड़ोस में मुफ्त की दवा और डॉक्टरों को मुहैया कराकर आप ने लोगों की ज़िदगी जबरदस्त बनाई. शिक्षा के मामले में सर्टिफिकेट अभी मिला है. #CBSE Result 2017 # सीबीएसई 12वीं के नतीजों में सरकारी स्कूलों ने साल में लाखों रुपये लूटने वाले सरकारी स्कूलों को धूल चटा दी है.

वहीं सरकारी बनाम प्राइवेट स्‍कूलों की तुलना करें तो पास प्रतिशत में कम सुविधाओं में पढ़े बच्‍चों ने बाजी मारी. सरकारी स्‍कूलों के 82.29 प्रतिशत बच्‍चे पास हो गए जब‍कि प्राइवेट स्‍कूलों के 79.27 प्रतिशत ही बच्चे पास हुए. व्यक्तिगत तौर पर तो छात्रों ने टॉप किया ही है. लेकिन स्कूल स्तर पर जवाहर नवोदय विद्यालय ने देश में परचम फहराया है. प्राइवेट स्कूलों के नतीजों से दिल्ली सरकार के स्कूलों के नतीजे 9 फीसदी ज्यादा अच्छे रहे.

CBSE द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 6 कैटेगिरी के स्कूल-कॉलेज में जवाहर नवोदय विद्यालय पहले नम्बर पर रहा है. जवाहर नवोदय के 95.73 प्रतिशत बच्चे 12वीं की परीक्षा में पास हुए हैं. दूसरे नम्बर पर केन्द्रीय विद्यालय संगठन का कब्जा रहा है.

केन्द्रीय विद्यालय के 94.60 प्रतिशत बच्चे 12वीं की परीक्षा में पास हुए हैं. तीसरे नम्बर पर रहा है सेंट्रल तिब्बेतन स्कूल. इस स्कूल के 83.57 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं. इस स्कूल की देशभर में कई शाखाए हैं.

सबसे बुरा हाल रहा है प्राइवेट स्कूल का. प्राइवेट स्कूल के 79.27 प्रतिशत ही बच्चे पास हुए हैं. जबकि सरकारी स्कूल और सरकारी मदद से चलने वाले स्कूल चौथे और पांचवें स्थान पर रहे हैं.

सरकारी स्कूल के 82.29 प्रतिशत और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल के 81.63 प्रतिशत बच्चे 12वीं की परीक्षा में पास हुए हैं.

लड़कों पर फिर भारी पड़ी लड़कियां

सीबीएसई 12वीं की परीक्षा के रिजल्ट की बात करें तो हर बार की तरह से इस बार भी लड़कियों के हाथ बाजी लगी है. पिछले वर्ष 88.58 प्रतिशत लड़कियां तो 78.55 प्रतिशत लड़के पास हुए थे.

वहीं इस बार 2017 के रिजल्ट में भी लड़कियां छाई हुई हैं. 12वीं में जहां 87.50 प्रतिशत लड़कियां पास हुई हैं, तो 78 प्रतिशत लड़के ही पास हुए हैं.

दिल्ली सरकार ने पढ़ाई बेहतर करने के लिए स्कूलों में कई कदम उठाए थे. सरकारी स्कूलों में पीटीएम जैसे प्रयोग किए गए. स्कूलों में बेहतर इमारतें दी गई. शिक्षकों को विदेशी ट्रेनिंग दिलाई . देश भर के एक्सपर्ट की मदद ली. इस सब का नतीजा है कि परिणाम सरकारी स्कूलों से भी बेहतर आए.

 

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