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राजनीति 

योगीजी, तीन तलाक से पहले लव जिहाद बंद कराइए!

यूपी में लव जिहाद का मुद्दा एक बार फिर से सुर्खियों में है। पूर्व आईएएस अफसर सूर्य प्रताप सिंह ने इस मामले को लेकर फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी है जिससे आप समझ सकते हैं कि समस्या कितनी विकराल हो चुकी है। उन्होंने लव जिहाद को एक कड़वी सच्चाई मानते हुए लिखा है कि बुलंदशहर और एनसीआर के आसपास के तमाम इलाके इसका अड्डा बन चुके हैं। सूर्य प्रताप सिंह कुछ साल पहले तब चर्चा में आए थे जब उन्होंने किसानों के मुद्दे पर यूपी की अखिलेश यादव सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। दरअसल सूर्य प्रताप सिंह की ये पोस्ट तब बेहद अहम हो गई जब दिल्ली की तथाकथित राष्ट्रीय मीडिया लव जिहाद को लेकर भ्रम फैलाने में जुटी है। पश्चिमी यूपी के तमाम शहरों में ऐसे मामले अब भी लगातार सामने आ रहे हैं जिनमें मुसलमान लड़के हिंदू नामों से हिंदू लड़कियों को फंसाते हैं और बाद में उनको ब्लैकमेल करके शादी कर लेते हैं। शादी से पहले लड़कियों का बाकायदा धर्म परिवर्तन कराया जाता है। बाद में इन लड़कियों को तीन बार तलाक देकर छोड़ दिया जाता है। ऐसी लड़कियां लोक-लाज के डर से अपने घर भी नहीं जा पातीं और दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर होती हैं। अक्सर इन महिलाओं के पास बच्चे भी होते हैं जिनकी जिंदगी नर्क से भी गई गुजरी हो जाती है। हैरानी की बात है कि मीडिया उनकी खबरें नहीं दिखाता। खबर सिर्फ तब बनती है जब लव जिहाद के खिलाफ कोई संगठन आवाज उठाता है। कारण ये कि बुलंदशहर, मेरठ और पश्चिमी यूपी के तमाम शहरों में बड़े अखबारों और चैनलों के रिपोर्टर मुसलमान हैं। ये सभी लव जिहाद रैकेट के एक्टिव सदस्य भी हैं।

लव जिहाद का अड्डा बुलंदशहर

अपनी पोस्ट में सूर्य प्रताप सिंह ने लिखा है कि बुलंदशहर जिला लव जिहाद का अड्डा बन चुका है। उन्होंने अपना एक अनुभव लिखा है। जिसमें उन्होंने बताया है कि “बुलंदशहर से मेरा एक परिचित परिवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने आया था। पति और पत्नी दोनों बहुत परेशान थे और वो मुझसे भी मिलने आए। उनकी व्यथा सुनकर मैं उन्हें डीजीपी सुलखान सिंह के पास ले गया। इस परिवार की कहानी सुनकर मैं हैरान हूं। बुलंदशहर के पहासू और ककोड कस्बों में दो संभ्रांत हिंदू परिवारों की नाबालिग बच्चियां बीते 10 दिन से गायब हैं। 10 दिन से इन दोनों कस्बों में सांप्रदायिक तनाव है। बताया गया कि बुलंदशहर और एनसीआर के इस इलाके की सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों लड़कियां बरसों से गायब हैं। इनमें से ज्यादातर का आज तक कोई सुराग भी नहीं मिल सका है। बताया जाता है कि ये वो लड़कियां हैं जो लव जिहाद की साजिश का शिकार हो चुकी हैं।” पूर्व आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने इस पूरे मामले की जांच की जरूरत बताते हुए यह डर भी जताया है कि इस फेसबुक पोस्ट के बाद कुछ लोग मुझे भी हिंदूवादी कहकर खारिज करने की कोशिश करेंगे। लेकिन उन्होंने बार-बार लिखा है कि बुलंदशहर और आसपास के इलाकों में लव जिहाद एक संगठित अपराध की तरह उभर चुका है और ये तब भी जारी है जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बन चुकी है।

लव जिहाद को मीडिया का समर्थन!

अक्सर जब भी लव जिहाद का मामला उठता है मीडिया एक सोची-समझी साजिश के तहत इसे राजनीति से जोड़ देता है। ताकि असल समस्या से ध्यान भटकाया जा सके। दिल्ली से मात्र 100 किलोमीटर दूर गांवों में सैकड़ों की तादाद में नाबालिग लड़कियां गायब हो रही हैं लेकिन मीडिया इसे कभी नहीं दिखाता। जब भी कोई मामला सामने आता है तो फौरन इसे प्यार-मोहब्बत का मामला बता दिया जाता है। जबकि ज्यादातर मामलों में शिकार लड़कियां नाबालिग थीं और शिकायत करने पर उनके माता-पिता को जान से मारने तक की धमकियां मिलती हैं। लेकिन मीडिया के कारण पूरे देश में ऐसा माहौल है कि लव जिहाद सिर्फ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाला मुद्दा है। जब कैराना में हिंदू परिवारों के पलायन की बात सामने आई थी तब भी मीडिया ने रातोंरात इस समस्या को सियासी रंग दे डाला था। इसी तरह जब एंटी-रोमियो अभियान शुरू हुआ तो मीडिया ने ही इसे धर्म का रंग दे दिया ताकि लव जिहाद के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके। ये बात हैरानी में डालती है कि कैसे देश के कई बड़े चैनल और अखबार खुलकर लव जिहाद के मुद्दे पर ऐसी धूर्तता भरी रिपोर्टिंग कर रहे हैं, जबकि जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। हाल ही में मेरठ में लव जिहाद का मामला सामने आया था, जिसमें लड़के ने अपना नाम असीम बताया था, जबकि वो बाद में मुसलमान निकला। इस मुद्दे पर टीवी चैनलों की रिपोर्टिंग देख लें तो पता चल जाएगा कि मीडिया कितना घिनौना खेल खेल रही है। जाहिर है इस खेल में चैनलों के संपादकों से लेकर संवाददाताओं तक को उनका पूरा हिस्सा मिल रहा है।

लव जिहाद में पुलिस भी शामिल!

यूपी सरकार में तमाम अहम पदों पर रहे आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने खुलकर कहा है कि पुलिस पैसे के लालच में इस पूरे खेल में शामिल है। ये आरोप पहले भी लगते रहे हैं कि यूपी पुलिस लव जिहाद के मामलों को अब तक रफा-दफा करती रही है। उसकी ये आदत अब भी बनी हुई है। योगी सरकार आने के बाद जितने भी मामले रोशनी में आए हैं उन सबमें पुलिस ने दोषी लड़कों पर कार्रवाई करने के बजाय ऐसी धाराएं लगाईं जिससे वो आसानी से छूट सकें। अब योगी आदित्यनाथ के लिए बड़ी चुनौती है कि वो मीडिया के इस प्रोपोगेंडा के बीच कैसे उस मुद्दे पर लगाम लगा पाते हैं, जिस पर चुनाव से पहले वो खुलकर बोला करते थे। जब एंटीर रोमियो स्क्वॉड की छापेमारी चल रही थी तब भी ये मामला उठा था कि छेड़खानी बंद करना जरूरी है, लेकिन साथ ही लव जिहाद के पीड़ितों की समस्या पर भी ध्यान देना जरूरी है। आम तौर पर ये लड़कियां एक या दो बच्चे पैदा करने के बाद तलाक देकर दर-दर भटकने के लिए छोड़ दी जाती हैं। शादी से पहले ही इनकी पहचान और बच्चों के नाम मुसलमानों के रख दिए गए होते हैं, लिहाजा इनका हिंदू समाज में लौटना भी संभव नहीं रहता। यह बात अक्सर सामने आती रही है कि लव जिहाद के लिए मदरसों में बाकायदा रेट कार्ड तय है। सिख लड़की से शादी करने पर 7 लाख, हिंदू से शादी करने पर 5 लाख रुपये दिए जाते हैं। इस पैसे का एक हिस्सा बाकायदा पुलिस तक भी पहुंचता है।

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