You are here
Editor's Choice लेटेस्ट न्यूज़ 

बेधड़क शराब पीजिए… ये है उड़ता बिहार!

बिहार में शराबबंदी को एक साल पूरा होने के बाद इंडिया टुडे ने जमीनी हकीकत की जांच की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. तहकीकात से सामने आया कि तस्करी से लाई जाने वाली शराब का बड़ा ब्लैक मार्केट राज्य में खड़ा हो गया है. ड्राई स्टेट होने के बावजूद नशीले पदार्थों का सेवन धड़ल्ले से हो रहा है.

तहकीकात के नतीजे पर संक्षेप में कहे तो, बिहार का हश्र भी ‘उड़ता पंजाब’ जैसा होता दिखाई दे रहा है. यहां शराबबंदी ने नशे के कई नए द्वार खोल दिए हैं. नेपाल बॉर्डर से महज दो किलोमीटर की दूरी पर रक्सौल के टैक्सी स्टैंड सुबोध कुमार खाने-पीने के सामान का खोखा चलाता है. लेकिन वो इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर से मिला तो उसने अपनी अलग तरह की ही पहचान बताई.

कुमार ने शेखी बधारते हुए कहा- ‘ये मशहूर दुकान है जिसकी पहचान दिल्ली और हरियाणा तक है.’ इसके बाद उसने गांजे के कई पैकेट काउंटर पर निकाल कर रखे. कुमार ये दिखाना चाह रहा था कि वो बिहार के संगठित ड्रग माफिया का ही हिस्सा है.

कुमार ने प्रतिबंधित पैकेट के बारे में बताया कि ये उम्दा क्वालिटी का है और हर पैकेट की कीमत 100 रुपए है. हालांकि कुमार ने जो दिखाया वो सिर्फ सैम्पल था. बिहार में छोटे स्टाल से ऑपरेट करने वाला ये शख्स गांजे का बड़ा सप्लॉयर निकला.

अंडर कवर रिपोर्टर से कुमार ने कहा, ‘कितना चाहिए? मैं इसे 5-5 किलो की खेप में भेज सकता हूं.’ अगली ही सांस में कुमार ने अपनी प्राइज लिस्ट भी बता दी. कुमार ने एक किलो गांजा के थोक में दाम 16,000 रुपए बताए. साथ ही साफ किया कि खेप भेजने में जो खर्चा आएगा वो अलग से देना होगा.

अंडर कवर रिपोर्टर ने पूछा कि ट्रांसपोर्टेशन में कितना खर्च होगा, इस पर कुमार का जवाब था- ‘ये किलो के हिसाब से होगा. मोतीहारी (पूर्वी चंपारण) जिले के बॉर्डर तक 1500 रुपए प्रति किलो.’

कुमार ने फिर गांजा तस्करी के पूरे ढांचे का खुलासा किया. कुमार ने दावा किया- ये नेपाल से आता है. बॉर्डर पार हो जाता है. हमें सिर्फ प्रशासन को भुगतान (घूस) करना होता है.ये 5,000 रुपए से लेकर 10,000 रुपए महीना हो सकता है.

 

रिपोर्टर ने हैरानी जताई- ‘क्या वो (अधिकारी) यहां भी पैसा लेते हैं.’

कुमार- ‘वो हर जगह लेते हैं. यहां 3,000 रुपए (महीना) का रेट है.’

इंडिया टुडे ने कमोवेश बिहार के हर राज्य में ऐसी ही स्थिति पाई. मिसाल के तौर पर सीतामढ़ी के भिट्टा मोड़ पर विजय नंद बेखौफ गांजा बेचता दिखाई दिया. सुरसंध चौक पर कालीचरण और पुपरी में रणधीर सिंह और प्यारे बाबा यही काम करते दिखे. मधुबनी जिले में इंडिया टुडे की जांच टीम ने एक नाबालिग लड़के को भी नशीले पदार्थ की बिक्री में लिप्त पाया.

बिहार की राजधानी पटना के पॉश इलाके बोरिंग रोड की एक पान की दुकान से भी इंडिया टुडे की जांच टीम ने गांजे की खरीद-फरोख्त होते देखी. लैंडमार्क कृष्णा अपार्टमेंट्स के सामने स्थित सिगरेट-पान के बूथ से नशीले पदार्थ को ऊंची कीमत वसूल कर बेचा जा रहा था. बूथ मालिक दिनेश कुमार ने एक छोटा सा पैकेट आगे करते हुए कहा, ‘पहले इसे चख कर देखिए. आपको जितनी मात्रा चाहिए मिल जाएगी.-100 ग्राम, 50 ग्राम, 200 ग्राम.’

रिपोर्टर ने पूछा- ‘200 ग्राम की क्या कीमत होगी?’

दिनेश कुमार ने जवाब दिया- ‘ये आपको 4000 रुपए का पढ़ेगा.’

सरकारी और गैर सरकारी सूत्रों से हासिल आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल शराबबंदी के लागू होने के बाद से नशीले पदार्थों के कारोबार में खतरनाक ढंग से इजाफा हुआ है.

पटना के गैर मुनाफा संगठन ‘दिशा नशामुक्ति और पुनर्वास केंद्र’ ने बताया कि 2016 के बाद से नशीले पदार्थों की लत का इलाज कराने वालों की संख्या में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है. ‘दिशा’ के महासचिव दीपक कुमार के मुताबिक इसी अवधि में शराब की लत का इलाज कराने वालों की संख्या में 80 फीसदी की कमी आई है.

2015-16 में गैर सरकारी संगठन ने गांजा/चरस की लत वाले कुल 1,509 लोगों का इलाज किया. 2016-17 में ये संख्या बढ़कर 1,921 हो गई.

मादक पदार्थों की धरपकड़ करने वाले अधिकारियों के मुताबिक 2015 में 12 किलो और 2016 में 382 किलो गांजा पकड़ा गया. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस साल अप्रैल तक ही 7,000 किलो गांजा पकड़ा गया.

पटना के दिशा पुनर्वास केंद्र पर इलाज करा रहे एक युवा छात्र ने बताया कि पहले उसे शराब की लत थी, लेकिन शराब नहीं मिलने की वजह से वो व्हाईटनर (करेक्शन फ्लूइड) का इस्तेमाल करने लगा. इस छात्र के गले में संक्रमण की वजह से पट्टी बंधी हुई दिखी.

छात्र ने बताया, ‘मैं छुट्टियों पर घर आया था. मुझे यहां आसानी से शराब नहीं मिली. इसलिए मैंने अपने एक दोस्त के कहने पर व्हाईटनर लेना शुरू कर दिया. जब मेरे पिता को पता चला तो उन्होंने मुझे इस पुनर्वास केंद्र में भर्ती कराया.’

कुछ युवकों ने शराब नहीं मिलने की वजह से मुजफ्फरपुर में नशे के इंजेक्शन लेना शुरू कर दिया. इनमें से एक ने बताया कि ये शराब से भी सस्ता पड़ता है.

इंडिया टुडे की जांच से सिर्फ गांजा या नशीले पदार्थ की खपत में बढ़ोतरी का ही खुलासा नहीं हुआ. इससे बिहार में तस्करी की शराब का बड़ा काला बाजार भी बेनकाब हुआ.

मधुबनी के बेनीपट्टी में शराब तस्कर विजय ने कबूल किया कि वो अमीर ग्राहकों के चुनींदा गुट को ब्रैंडेड शराब उपलब्ध कराता है. विजय ने एक बोतल निकाल कर दिखाते हुए उसकी कीमत 400 रुपए बताई. विजय ने ये भी कहा कि ये नकली नहीं असली है. विजय ने अपने ग्राहकों में डॉक्टरों और सर्किल व ब्लॉक अधिकारियों को गिनाया.

विजय के मुताबिक वो देश के अंदर या नेपाल, कहीं से भी शराब मुहैया करा सकता है. विजय ने कहा, ‘अगर आप हरियाणा प्रोडक्ट लेंगे तो एक बोतल 1,600 रुपए की पड़ेगी. अगर नेपाली चाहिए तो वो भी इतने की ही पड़ेगी.’

विजय ने ये भी दिखाया कि शराब किस तरह नेपाल से बिहार पहुंचती है. ये दस पहिया ट्रकों में रेत, कंक्रीट और कोयले के नीचे छुपा कर लाई जाती है. इंडिया टुडे जांच टीम ने बिहार के कुछ होटलों में भी प्रीमियम कीमत पर शराब और बीयर को बिकते देखा. रक्सौल में नेपाल बॉर्डर के पास स्थित होटल कावेरी के मैनेजर ईश्वर कुमार ने कहा, ‘आप जो भी चाहेंगे वो हम वहां (नेपाल) से ले आएंगे. वहां शराब का स्टोर है. वो प्राइवेट नहीं सरकारी है.’

अंडर कवर रिपोर्टर ने पूछा कि कितनी बोतलों का इंतजाम हो सकता है. इस पर ईश्वर कुमार ने कहा कि जितनी भी आप मांग करें. रक्सौल के ही होटल आर.एस. में ठहरने वाले ग्राहकों को दुगनी कीमत पर शराब और बीयर बेची जा रही थी. होटल के एक कर्मचारी भोला पटेल ने कहा, ‘यहां शराब पर बैन है. लेकिन आप यहां ठहरते हैं तो आपको ये मिल जाएगी.’

रिपोर्टर ने पूछा कि क्या 20 बोतलों का इंतजाम हो जाएगा. पटेल ने जवाब दिया- ‘हां, हो जाएगा, अगर आप चाहोगे तो 40 का भी इंतजाम कर दिया जाएगा.’

Source

 

Comments

comments

Related posts