बिहार में तैनात IAS, जो अपने बॉडीगार्ड से भी जुर्माना वसूल लेता है

वो 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वो आईआईटीयन हैं. दिल्ली आईआईटी से उन्होंने पढ़ाई की है. रहने वाले जयपुर के हैं. फिलहाल वो बिहार के सहरसा जिले के एसडीओ सदर हैं. नाम है सौरभ जोरवाल. उनकी चर्चा इसलिए कि लोग कर रहे हैं. और करें भी क्यों न. काम ही कुछ ऐसा किया है इस अधिकारी ने.

 

शहर को जाम से छुटकारा दिलाया

सहरसा से पहले पूर्णिया में रहे सौरभ ने सहरसा की तस्वीर बदल दी है. वहां के लोगों की मानें तो सौरभ ने सहरसा के थाना चौक, डीबी रोड और शंकर चौक से अतिक्रमण खत्म करवा दिया है. ऐसा पिछले 33 साल में नहीं हुआ था. शहर के रहने वाले रमन ठाकुर ने अपने फेसबुक पर लिखा है कि सब्जी मंडी से अतिक्रमण हटाकर उन्होंने सुपर मार्केट बनवा दिया है. ऐसा पहले नहीं हुआ था. शहर का अतिक्रमण भी हट गया और किसी ने कोई हंगामा भी नहीं किया. इस फेसबुक पोस्ट को 600 लोग लाइक कर चुके हैं. इसके अलावा 35 लोगों ने इसे शेयर किया है और 150 लोगों ने कमेंट के जरिए सौरभ के काम की तारीफ की है.

अपने काम के बारे में बताते हुए सौरभ कहते हैं,

‘हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं. जितना हो सकता है, उतना बदलने की कोशिश कर रहे हैं.’

साइकल नहीं चल पाती थी, आज सुपर मार्केट है

अतिक्रमण हटाने की बात पर सौरभ कहते हैं कि जब वो पहली बार शहर आए तो सब्जी मंडी में साइकल खड़ी करने तक की जगह नहीं थी. लोगों से बात की तो उन्होंने भी जाम की बात तो मानी लेकिन वो लोग अपनी दुकानों के लिए जगह चाहते थे. डीएम और जिला प्रशासन की मदद से उनके लिए सुपर मार्केट बनवाया गया और लोग राजी-खुशी वहां शिफ्ट हो गए.

लोगों के हंगामे की बात पर सौरभ बताते हैं कि अतिक्रमण हटाने के बाद उन्होंने सब्जी मंडी में मैजिस्ट्रेट तैनात कर दिए. ये लोग अतिक्रमण करने वालों से जुर्माना वसूलते थे. जुर्माने की रकम 20, 000 रुपये तक हो सकती थी, लेकिन सिंबॉलिक तौर पर 800 रुपये जुर्माना लगाया गया. सौरभ बताते हैं कि जुर्माने का मकसद लोगों को मौका देना था किसी को परेशान करना नहीं. जुर्माने के दौरान किसी का फोन या कोई दबाव तो नहीं आया, के जवाब में सौरभ कहते हैं कि वह अपने मकसद में कामयाब इसीलिए हो सके, क्योंकि किसी ने उन्हें काम करने से नहीं रोका और जिले के डीएम विनोद सिंह गुंजियाल ने उन्हें पूरी मदद की.

पूर्णिया और मैला आंचल

सौरभ बताते हैं कि इससे पहले उनकी पोस्टिंग पूर्णिया में थी. इससे पहले उन्होंने फणीश्वरनाथ रेणु का मशहूर आंचलिक उपन्यास मैला आंचल पढ़ा था. आने के बाद पता चला कि 50 साल बाद भी स्थितियों में कोई खास बदलाव नहीं आया है. काम के दौरान आ रही दिक्कतों पर सौरभ कहते हैं कि बस अनुभव की कमी है. जहां लगता है कि पुराने अनुभव की जरूरत है, वहां पुराने अधिकारियों की मदद लेते हैं. किसी तरह की दिक्कत होने पर अपने बैच के अधिकारियों से भी बात कर लेते हैं.

तकनीक का इस्तेमाल

सौरभ अपने काम को अंजाम देने के लिए तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करते हैं. सहरसा में शहर में पानी निकासी की खासी दिक्कत थी. सौरभ ने इस मुद्दे पर डीएम से बात की, लेकिन समाधान नहीं निकला. इसके बाद उन्होंने गूगल मैप का सहारा लिया और शहर की पानी निकासी की दिक्कतें दूर कर दीं.

 

 

गूगल मैप की सहायता से सौरभ ने सीवर लाइन बनवा दी और शहर में पानी निकासी की दिक्कत दूर हो गई.

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